रविवार, 28 नवंबर 2010

शहीदों के जिस्‍म पर .. इंजीनियरर्स की परेशानी .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार .. आज एशियाई खेलों का आखिरी दिन है, भारत के लिए पदकों का सफर अब खत्म हो चुका है। एथलेटिक्स और बॉक्सिंग में अपने खिलाड़ियों के जोरदार प्रदर्शन के कारण भारतीय दल ने कुल मिलाकर 14 गोल्ड, 17 सिल्वर और 33 ब्राउंज सहित कुल 64 मेडल जीते। चीन 197 गोल्ड मेडल के साथ नंबर वन बना हुआ है। जबकि दूसरे नंबर पर 75 गोल्ड मेडल के साथ दक्षिण कोरिया है। जापान तीसरे नंबर पर है, जबकि भारतीय दल 14 गोल्ड मेडल के साथ छठे नंबर पर मौजूद है। इस खास खबर के बाद कुछ नए चिट्ठों और चिट्ठाकारों से मिलिए ....

आज हर धर्म मे दो प्रकार के संप्रदाय है । जो साकार ब्रह्म को मानते हैं वो निराकार ब्रह्म को भी मानते हैं परंतु जो निराकार ब्रह्म को मानते हैं वो साकार ब्रह्म की नही मानते और पलट इसकी आलोचना भी करते हैं ।इस तरह हर धर्म मे हैं । हिंदुओं मे आर्य ,जैन मे स्वेतांबर और दिगंबर ,मुस्लिमो मे सिया सुन्नी एसे ही ईसाइयों मे भी हैं सब कंही न कंही हिन्दू धर्म का अंश रह चुके हैं इस बात का प्रमाण सभी धर्मो के धर्मग्रंथों मे मिलता है। मै यंहा सिर्फ उन हिंदुओं को जो आर्य समाज को मानते हैं । यह पूछता हूँ की हमको तो विश्वास है ब्रह्म के साकार और निराकार दोनों होने का और हम प्रमाणित भी कर सकते हैं पर क्या वो प्रमाणित कर सकते हैं की सिर्फ निराकार ब्रह्म है , कभी नही कर सकते । उन्होने सिर्फ वेदों की एक बात पकडली है "निराकार ब्रह्म "उसके आगे न कुछ बता सकते न ही प्रमाणित कर सकते हैं ।


कल रात बरसी बारिश की रिमझिम फुहार है।

सर्दियों की शुरू हो गई अब बहार है।।


अब तो निकलेंगे मोटे कंबल, जैकेस, मौजे और रजाइयां,
हीटर और गीजर भी पानी गर्म करने को तैयार है।
दिन होते जायेंगे अब तो छोटे, छोटे और छोटे,
और रातें बड़ी, बड़ी और बड़ी हो जाने को तैयार हैं।। कल रात बरसी बारिश...



रोज़ नए नए घोटाले,"कॉमन वेल्थ,आदर्श सोसाइटी,रुचिका केस..." और आज एक और नयी बात सुनी "भारत पहले नो. पे है,जिसका सबसे ज्यादा काला धन स्विस बैंक में है(६५,२२५ अरब),(हर साल तकरीबन देश के हर नागरिक को २,००० रुपये,३० साल तक मिलें तो बनता है इतना रूपया|
ठोक बजाकर ये तो हम कह देते हैं,"इंडिया इस डेवेलोपिंग कंट्री".......पर शिक्षा बजेट से ६ गुना ज्यादा "२ ग" घोटाला है| 
नेहरु जी ने कहा था "घूसखोरों को बिजिली के खम्बों के साथ बांधकर मारना चाहिए" पर शायद खम्बे ही कम पड़ जायेंगे| 
"आखिर हमारा देश चल कैसे रहा है? सब हमारे सामने है......कौन करप्ट नहीं है....|
"उनको श्रधांजलि  अर्पित करता हूँ, जिन्होंने दिल्ली इमारत हादसे में अपनी जान गँवाई|"
"WHAT IF OUR INDIA WILL BE..


इस जहर से हर शख्स अनजान बनकर क्यों बैठा है। इस जहर को अपने जीवन का हिस्सा क्यों माने है? खतरे से आपको आगाह करना हमारा धर्म है। आप माने या न माने ये आपका कर्म है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं उस खतरे की जो धीरे-धीरे दबे पांव भारतवर्ष की एक अरब से भी ज्यादा आबादी में अपने पैर पसारने के लिए छटपटा रहा है। हम यहां बात कर रहे है उन जीन प्रसंस्कृत उत्पादों की जो न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा हैं बल्कि मानव शरीर के लिए भी किसी मीठे जहर से कम नहीं है।


डायपर से लाल चकत्ते अपने बच्चे के ही मूत्र से ले कर नया भोजन तक किसी भी कारण से हो सकते हैं. कुछ कारणों की चर्चा हम आज कर रहे है . 
नमी: यहां तक कि सबसे शोषक डायपर आपके बच्चे की नाजुक त्वचा पर कुछ नमी छोड़ देता है. और जब आपके बच्चे का मूत्र मल के बैक्टीरिया के साथ घूल जाता है, तो यह टूट कर अपने रासायनिक रूपों मे अर्थार्त अमोनिया मे बदल जाता है , जो की आपके बच्चे की नाजुक त्वचा पर बहुत कठोर हो सकता है


बुद्धि, कौशल हर चीज में किरण लड़कों से कम नहीं। 'लोग क्या कहेंगे' इस बात की किरण ने कभी भी परवाह नहीं करते हुए अपनी जिंदगी के मायने खुद निर्धारित किए। अपने जीवन व पेशे की हर चुनौती का हँसकर सामना करने वाली किरण बेदी साहस व कुशाग्रता की एक मिसाल हैं, जिसका अनुसरण इस समाज को एक सकारात्मक बदलाव की राह पर ले जाएगा। 'क्रेन बेदी' के नाम से विख्यात इस महिला ने बहादुरी की जो इबारत लिखी है, उसे सालों तक पढ़ा जाएगा।

हमने की खास मुलाकात किरण बेदी जी के साथ।

आज ना जाने क्यों किसी एक दोस्त के एक एस ऍम एस (मेसेज) ने मन को झंझोड़ कर रख दिया | वो उस मेसेज के माध्यम से शायद मुझसे कुछ कहना चाहता था या कुछ पूछना चाहता था | 
उसने मेरे सामने भारत की वो तस्वीर रखने की कोशिश की जिसे शायद हम देखते हुए भी अनदेखा सा करते हैं |
कुछ बातें जो उसकी मुझे छु गयीं उन्हें यहाँ वर्णित कर रहा हूँ |


दस चेहरे अपने 
कब चाहा था मैंने 
एक ही चेहरा अन्दर 
और एक ही चेहरा बाहर 
बनाये रखा बरसों 

बदलती जा रही हूँ 
पुराने वजूद को 
जब ग़मगीन होती 
मुस्कराहट का मुखौटा 
चढ़ा लिया
नयनों से धारा बन बहते आंसू की जगह 
सख्त, तने चेहरे लिए

जब से देखा है तेरी .झील से आंखे,.......मैं जीना सीख गया हू
POET- PARVIN ALLAHABADI & MEHEK SULTANA

तेरी सादगी में क्या बात थी
तेरे सादगी में क्या बात थी
वोह तो पुरी के पुरी अल्लाहाबाद थी

तेरी सादगी में क्या बात थी
तेरे सादगी में क्या बात थी
वोह तो पुरी के पुरी अल्लाहाबाद थी

तू ही गंगा, तू ही दुर्गा, तू ही थी वोह सावत्री
तू ही सीता, तू ही यशोदा, टू ही माता सबरी 

शहीदों के जिस्म पर लगेंगे कब तलक जख्म गहरे,
कब तक बैठे रहेंगे निर्वाक लगाए सोच पर पेहरे,
निर्दोश लहू आखिर कब तक शहीद कहलाएगा,
पाक की सरजमीं पर तिरंगा कब लहराएगा !!

आज़ाद घूम रहे दुश्मन दोस्तों के ही भेस में,
मुल्ला-उमर,लादेन जैसे पनप रहे आज के परिवेश में,
पह्चान ही गये हैं जब हम अपने दुश्मनों को तो,
विलम्ब क्यूं लग रहा समर बिगुल के आदेश में !

जब इंटरनेट और ब्लॉग की दुनिया में आया तो सोनिया गाँधी के बारे में काफ़ी कुछ पढने को मिला । पहले तो मैंने भी इस पर विश्वास नहीं किया और इसे मात्र बकवास सोच कर खारिज कर दियालेकिन एक-दो नहीं कई साईटों पर कई लेखकों ने सोनिया के बारे में काफ़ी कुछ लिखा है जो कि अभी तक प्रिंट मीडिया में नहीं आया है (और भारत में इंटरनेट कितने और किस प्रकार के लोग उपयोग करते हैंयह बताने की आवश्यकता नहीं है) । यह तमाम सामग्री हिन्दी में और विशेषकर "यूनिकोड" में भी पाठकों को सुलभ होनी चाहियेयही सोचकर मैंने "नेहरू-गाँधी राजवंश" नामक पोस्ट लिखी थी जिस पर मुझे मिलीजुली प्रतिक्रिया मिलीकुछ ने इसकी तारीफ़ कीकुछ तटस्थ बने रहे और कुछ ने व्यक्तिगत मेल भेजकर गालियाँ भी दीं (मुंडे-मुंडे मतिर्भिन्नाः) । 

लन्दन के हीथ्रो एअरपोर्ट से जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, श्याम का दिल बल्लियों उछलने लगा. बचपन की स्मृतियाँ एक-एक कर मानस पटल पर उभरने लगीं और जैसे-जैसे विमान आसमान की ऊँचाई की ओर बढ़ता गया, वह आस-पास के वातावरण से बेसुध अतीत में मग्न होता चला गया. माँ की ममता, पिताजी का प्यार, मित्रों के साथ मिलकर धमाचौकड़ी करना, गाँव के खेल, नदी का रेता, हरे-भरे खेत, अनाजों से भरे खलिहान और वहां कार्यरत लोगों की अथक उमंग, तीज त्यौहार की चहल-पहल आदि ह्रदय को रससिक्त करते गए.

गाँव के खेलों की बात ही कुछ और है. चिकई, कबड्डी, कूद, कुश्ती, गिल्ली-डंडा, लुका-छिपी, ओल्हा-पाती, कनईल के बीज से गोटी खेलना, कपड़े से बनी हुई गेंद से एक-दूसरे को दौड़ा कर मारना आदि-आदि. मनोरंजन से भरपूर ये स्वास्थ्यप्रद खेल शारीरिक और मानसिक उन्नति तो प्रदान करते ही हैं, इनमें एक पैसे का खर्च भी नहीं होता है. अतः धर्म, जाति, सामाजिक-आर्थिक अवस्था से निरपेक्ष सबके बच्चे सामान रूप से इन्हें खेल सकते हैं.

चम्पक वन में शेरा नामक एक शेर रहता था एक दिन भोजन की तलाश में वह गुफा में बैठता था इस समय चिंकू चूहा वहां आया शेरा ने चिंकू को पकट लिया खुशी से उसका मन भर गया उसने कहा "आज तुम मेरे हाथ से नहीं बचेगा हां! हां!"
चिक्कू ने विनम्रता से कहा "हमेशा सब की हाल एक तरह नहीं होगा ' मुझ पर दया करो शेरा , अब मुझे छोड़ दो तो समय आने पर मैं तुमारी सहायता करूंगी उसने रोने लगा यह सुनकर शेरा ने हस लिया उसने चिक्कू पर हसने लगा
"तुम, इतना छोट्टा ,मेरे सहायता करें हा! हा! हा! ,देखते हें तुम मुझे कैसे सहायता करती हें "
इतना कहकर शीरा ने चिक्कू को छोड़ दिया

 सफल इन्सान बनना हैं तो शिक्षा का मार्ग उतम हैं" स्कूल की मिटती यादो में बस एक यही लाइन यादहैं समझ नहीं आता १२ साल स्कूल क्यूँ गया क्या सिखा क्या मिला स्कूल ने इंसानों के अन्दर सपनो की दुकान खोल दी जो वकत के साथ बड़ा होता चला गयायाद हैं मुझको माँ की १५० रूपये की वोह वेतन और पापा का कुल आय २०० जिसमे घर भी चलता था

  कहने को तो कुछ दिन में अब, मै भी इंजीनीयर कहलाऊँगा,
    टेक्नोलाजी और साफटवेयरस के ही,गीत सबको सुनाऊँगा,
 पर दरद का ये किस्सा पुराना,
 डिग्री के वास्ते खत्म हुई है मेरी जवानी।
कहता हूँ मै इक ऐसी कहानी.                                                           इंजीनीयरस की परेशानी,
इक इंजीनीयर की जुबानी।

 चिकित्सक भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं। इस वाक्य को इसलिए भी इसे जोर देते हुए लिख रहा हूँ कि मैं आज डाक्टर की वजह से ही इस लेख को लिखने तक की सफलतम जीवन यात्रा पर हूँ...। व्यक्तिगत मामले पर अधिक चर्चा न करते हुए मैं डाक्टर के पवित्र पेशे की वास्तविकता और वर्तमान में विदू्रप हो चुके चरित्र पर भी चर्चा करना चाहूँगा।
चिकित्सा जगत में नित नये अनुसंधान हो रहे हैं। नई-नई दवाइयों और उपचार के विधियों से असाध्य रोग भी साध्य हो गये हैं। जिस क्षय रोग के चलते व्यक्ति के लिए अंतिम सांसें गिनना ही शेष रह जाता था। परिवार से ही उपेक्षित हो जाता था। 

अब चलती हूं .. नमस्‍कार !!

8 टिप्पणियाँ:

sngita ji ped aek or hr shaakhaa alg alg bhut khub chayn he is andaaz ko to hmeshaan yad rkhne ko ji chahta he . akhtar khan akela kota rajsthan

शुक्रिया बेहतरीन लिन्क्स

बढ़िया नए चिट्ठे ...अच्छी वार्ता

बहुत रोचक चर्चा. सुन्दर लिंक्स...आभार

सुंदर शब्दों में सजी अच्छी वार्ता |बधाई
आशा

मैं बंटी चोर जूठन चाटने वाला कुत्ता हूं। यह कुत्ता आप सबसे माफ़ी मंगता है कि मैने आप सबको परेशान किया। जाट पहेली बंद करवा के मुझे बहुत ग्लानि हुई है। मेरी योजना सब पहेलियों को बंद करवा कर अपनी पहेली चाल्लू करना था।

मैं कुछ घंटे में ही अपना अगला पोस्ट लिख रहा हू कि मेरे कितने ब्लाग हैं? और कौन कौन से हैं? मैं अपने सब ब्लागों का नाम यू.आर.एल. सहित आप लोगों के सामने बता दूंगा कि मैं किस किस नाम से टिप्पणी करता हूं।

मैं अपने किये के लिये शर्मिंदा हूं और आईंदा के लिये कसम खाता हूं कि चोरी नही करूंगा और इस ब्लाग पर अपनी सब करतूतों का सिलसिलेवार खुद ही पर्दाफ़ास करूंगा। मुझे जो भी सजा आप देंगे वो मंजूर है।

आप सबका अपराधी

बंटी चोर (जूठन चाटने वाला कुत्ता)

संगीता जी बहुत देर से किसी भी चिट्ठा चर्चा मे जाना बन्द किया हुया था लेकिन आपके चिट्ठे पर आना ही पडा। बहुत अच्छे लिन्क मिले। धन्यवाद।

बहुत सुन्दर चर्चा ...अच्छे लिंक्स मिले.....

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