शुक्रवार, 1 जून 2012

धरती पर यमराज के एजेंट और मैं बूँद ... कहाँ जाऊं ...? ...ब्लॉग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...कोयला ब्लाक आवंटन में लगाये गए भ्रष्टाचार के आरोप से व्यथित होकर प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने चुनौती दी है, कि यदि इस मामले में उनपर लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो वे राजनीती और सार्वजनिक जीवन से सन्यास ले लेंगे. पी एम ने यह भी कहा कि ऐसे बयां गैरजिम्मेदाराना और दुर्भाग्यपूर्ण हैं. टीम अन्ना के एक सदस्य ने उन्हें "शिखंडी" तक कह दिया है, लगता है अब वक़्त आ गया है, जब हमें भी पता चलेगा कि आज का भीष्म पितामह और अर्जुन कौन है??   आइये दूर निकल चलते हैं, इस राजनीती कि दुनिया से और चलते है सैर पर अपनी ब्लॉग नगरी की. प्रस्तुत है, आज की ब्लॉग 4 वार्ता पर मेरी पसंद के कुछ लिंक्स के साथ....
इंतजार जीवन की ढ़लती शाम में ना जाने कितने बुजुर्ग कमजोर और थकते शरीर को लेकर अकेले पन के भंवर जाल में जकड़े हुए हैं केवल इस आस में कि विदेश में बसा बेटा एक दिन जरुर लौट कर आएगा । इन बुजुर्ग माता पिता की आँखे ... अगले मोड़ पर ही...! किसी भी बात पर जब मिथ्याभिमान होने लगे, तो, याद रहे... तुमसे भी कोई बड़ा है! कितना भी वृहद् हो गगन, अपने मद में हो लें हम कितने भी मगन; वक़्त सबको नाप लेता है, सारे हिसाब देख लेने को वो अगले मोड़ पर खड़ा है!...नैनीताल भाग 3 * * * * *आज तुझसे प्यार करने को दिल चाहता हैं ...* *तुझे छूने, तुझमें समाने को दिल चाहता हैं ....* * * * * * * * * *हम सपरिवार ता. 9 को मुम्बई से चले थे नैनीताल :----* * * * * नैनीताल भाग 1 पढने के लिए यह...

रिसता मन उपालम्भों से आती है हर रिश्ते में खटास शिकवे नहीं रख पाते मन में मिठास टूट जाए जब एक बार विश्वास कैसे करे कोई फिर प्रेम की आस ? होता है हर बात से मन पर वज्राघात तो वाणी भी हो जाती है ...अपने लिए ***वे अपने लिए नारी की हरेक परत से गुज़रना चाहते हैं सकल पदार्थ प्यार , अनुभूतियाँ , चमत्कार ,बाज़ार , सरंक्षण , सभी कुछ अपनी सांसों में समेट नारी की नैसर्गिकता के त्याग भाव से चौंकते हैं * *विभिन्न... अपना रिश्ता कुछ यूँ है... *मेरा तुमसे ऐसा रिश्ता है जैसे....* *ख्वाब का जो ताबीर से है * *शीशे का जो तस्वीर से है * *सच्चाई का जो ज़मीर से है * *कैदी का जो जंजीर से है * *समंदर का जो माहि-गीर से है * *रांझे का जो हीर से है !!* * * *...

आज बारिश हुई है...बादल के पंखों मे कुछ लफ्ज़ बाँध कर भेजे हैं... बस पहुँचते ही होगे अभी... छत पर जाना और और खोल लेना उन्हें... फिर पढ़ कर बिखेर देना ज़मीन पर... चिंता मत करना, लोग नहीं समझ सकते... वो तो यही समझेंगे कि आज बार...धरती पर यमराज के एजेंट --- ललित शर्मा सुबह की सैर पर आज हल्की फ़ुल्की चर्चा ने गंभीर मोड़ ले लिया। बंसी काका कहने लगे - "अब बीमार होने से भी डर लगने लगा है, आम आदमी चाहता है कि बीमार ही न हो। सोचने से क्या होता है? पता नहीं कब धरती के यमराजों...मौत से कह दूंगा, रुक जा दो घड़ी, आने वाला है ज़माना प्यार का - सांस में सुर सनसनाना प्यार का ज़िन्दगी है ताना बाना प्यार का मौत से कह दूंगा, रुक जा दो घड़ी आने वाला है ज़माना प्यार का यों तो हर मौसम का अपन...

मैं बूँद ... कहाँ जाऊं ...? जब तक सांस चलती है तभी तक जीवन है ....!!हम चाहें तो सार्थक कर्म कर उसे सवाँर लें और प्रभु के चित्त में स्थान पा लें या ....पछताते रहें .....समय तो निकल ही जायेगा ...रुकेगा तो नहीं ............ श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (११वीं-कड़ी) द्वितीय अध्याय (सांख्य योग - २.५७-६३) शुभ को पाकर न हर्षित हो, न विषाद अशुभ से होता. है आसक्ति शून्य सर्वत्र, वह ही स्थिर बुद्धि है होता. जैसे कच्छप अंग सभी को सब ओरों से है समेटता. स्थिर बुद्धि इन्द्रिय... अनुरोध ! क्यों न ? तुम .. बाँध लो मेरा मन अपने जूडे की एक शोख लट से. अक्सर बड़ा ही अनमोल, अकल्पनीय सुकून पाया है... मेरे चंचल मन ने तुम्हारे गेसुओं की खुशबू में तुम्हारे पलकों की छांव में! रहा है आवारगी में बरस...

जन्मना एक कथानुसार महाभारत काल में पांडवों और कौरवौं में दुर्योधन और युधिष्ठिर के मध्य योग्य शासक के चयन का दायित्व विदुर को सौंपा गया। विदुर नीति निपुण थे अत: उनके द्वारा दुर्योधन और युधिष्ठिर से एक ही अपराध के .. कलयुग आ गया ? - बहुत दिनो के बाद आज मन ने कहा चलो आज कुछ लिखे, तो सोचा क्या लिखूं? तभी मन ने कहा जो तुम इस दुनिया मे देखते हे वोही लिखो....यह कोई कहानी नही एक सच्ची घटना ह... आज कुछ तूफ़ानी करते हैं .......... - * * * * * * * * * * *जब पिटरोल प्राईस बढाने का डिसीजन लिए थे बैड ,* *उससे पहिले मंतरी जी लोग यही साईत देख रहे थे ऐड,* *(आज कुछ तूफ़ानी करते हैं ....आज कुछ तू...प्रेम की दातून - मैं तो एक भी दिन इस दातून की कड़वाहट के बिना नहीं जी सकती . मुझे ,आदत हो गयी है,इसकी. मुझे दरअसल और कुछ नहीं हुआ है बस,प्यार से ही प्यार सा हो गया है . ब्...

आज की वार्ता को देते हैं विराम मिलते हैं, अगली वार्ता पर तब तक के लिए नमस्कार ..........

13 टिप्पणियाँ:

बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर वार्ता ,,,,

RECENT POST ,,,, काव्यान्जलि ,,,, अकेलापन ,,,,

बढ़िया और सुंदर वार्ता ...जवाब नहीं आपका संध्या जी

विस्तृत वार्ता ..... सुन्दर संकलन .....आभार

ब्लोगोदय में मेरे ब्लॉग की लिंक जोड़ दे,.....ब्लॉग का नाम "काव्यान्जलि" है कृपया ध्यान दे
http://dheerendra11.blogspot.com

बहुत सुन्दर संकलन --------आभार

बहुत बढ़िया लिंक्स संध्या जी....

आभार.
अनु

बहुत सुन्दर संकलन

बहुत सुन्दर लिंक लगाए हैं.

बढिया संकलन .. आभार !!

सुंदर लिंक्स.... बढ़िया वार्ता....
सादर आभार।

बहुत अच्छे लिंक्स और प्रस्तुति भी रोचक ।

bahut sundar links Sandhya ji ..
shubhkamnayen.

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