रविवार, 3 जून 2012

आ जाओ तुम बस्तर..मरने -- ब्लॉग4वार्ता -------- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  आज शाम को कुछ बूंदा-बांदी हुई अंधड़ के साथ, नव  तपा का आखरी दिन था। गरमी से कुछ राहत मिली। फ़ेसबुक पर डब्बू मिश्रा कह रहे हैं - धुंआधार बरसात...... प्यारी गर्मी चली गई.... अब तुम्हे मिलेगा नहाने को पानी...लेकिन जब पानी से भिगोगे तो गर्मी का सूखापन कहां से लाओगे..... काश ऐसी ही मधुर मधुर सूरज की तपीश सारे वर्ष हम सब पर कृपा बरसाती रहती... ना ये पानी होता ..ना कंबल खरीदने को ठंड... मस्त बरमूडा और सेंडो में घुमते ... दोपहर भर सोते और रातों को सैर पर निकलते ...ठंडी ठंडी हवा चल रही है ...लगता है प्यारी गर्मी जा रही है ...उफ्फ ...कैसे भुलाएंगे तुम्हे ...एक तुम ही तो हो जो दिन में दो बार नहलाती थी.... लाइट गोल हो जाने पर बीबी पंखा झलाती खाना खिलाती थी... पानी के लिये वो लंबी कतारे... टैंकरों की आड में निगमों के घोटाले...सच तुम बहुत याद आओगी गर्मी रानी... अब चलते हैं आज  की ब्लॉग4वार्ता पर प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा चिट्ठे………

नशे-नशे,में फ़रक नहीं बस,पी---- बस,जीनशे-नशे,में फ़रक नहीं फ़रक है,तो---असर नहीं नशा हो---बोतल का या हो, पीडाओं से ज़ाम भरा या, आंसू की गर्माहट सांस... बहुत खामोश लम्हे हैं. बहुत खामोश लम्हे हैं......मगर कुछ बात होती है * *कभी कहती अदा कुछ है....कभी नज़रों से होती है !* * * * वो तुझसे यूं ही मिल जाना...औ फिर मिल कर ब...मास्टर शौमैन राज कपूर साहब की २४ वी पुण्यतिथिरणबीर राज पृथ्वीराज कपूर (१४ दिसम्बर १९२४ - २ जून १९८८ *) *"चाहे कहीं भी तुम रहो ... तुम को न भूल पाएंगे ... " * * * *मास्टर शौमैन राज कपूर साहब की २४ वी पुण्यतिथि पर उनको शत शत नमन ! *

आ जाओ तुम बस्तर..मरने!!आज भी याद है वर्षों पुराना वह दिन जब हम लोगों को खबर मिली कि हमारे सबसे छोटे चाचाजी का तबादला बस्तर के सुदूर अंचल सुकमा में कर दिया गया है। हम सभी को लग रहा था जैसे कहीं देश से दूर भेजा जा रहा हो उन्हें...एक असीम गीत भीतर हैएक असीम गीत भीतर है निर्मल जैसे शुभ्र हिमालय स्वयं अनंत है व्यक्त न होता यही उहापोह मन को डसता ! एक असीम गीत भीतर है गूंज रहा जो प्रकट न होता यही उहापोह मन को खलता ! खिल न पाता हृदय कुसुम...अगर आप कभी देख सकेंआह ! बीस दिन पुरानी लू. दर्द से भरा बदन और हरारत. कुछ बातें, बेवजह की बातें... नाकामी से दुखी होकर ज़िन्दगी देखती है, नयी ज़मीन और सोचती है कोई नया रास्ता जहाँ से आगे शुरू किया जा सके, सफ़र. नाक...

प्रतीक्षाएक सनसनी दौड़ती है रगों में अखबारों की सनसनीखेज खबरों की तरह सड़क पर चलते हुए लौटते हुए ऑफ़िस से घर की ओर जब देखती हूं तुम्हे बढ जाती धड़कने जल जाती है हेडलाईटे जल जाती हैं स्ट्रीट लाईटें जैसे सांझ हो गयी हो ... दो सौ बार गिरना-संभलना, बनना-बिगड़नाये कोई ऐसा मील का पत्थर भी नहीं जिसका जश्न मनाया जाए। लेकिन अपने ड्राफ्ट्स में देखती हूं कि आज लिखी जाने वाली पोस्ट मेरी २००वीं पोस्ट है, तो मैं थमकर सोचने पर विवश हूं कि क्या हासिल रहा इस लिखाई का? मुझे ल...ललित डॉट कॉम खबर की पुष्टि की दैनिक भास्कर ने मैने दो दिन पूर्व अपनी पोस्ट धरती पर यमराज के एजेंट में डॉक्टरों द्वारा कम उम्र की महिलाओं को बीमारी का डर बता कर बच्चेदानी निकालने वाली घटना का जिक्र किया था। जिसमें मितानिनों की भूमिका की चर्चा भी की थी।...

पूछो तो भगवान है क्याएक नामुराद आशिक से किसी ने पूछा, “कहो जी, तुम्हारी माशूका तुम्हें क्यों नहीं मिली?”बेचारा उदास होकर बोला, “यार, कुछ न पूछो, मैंने इतनी खुशामद की कि उसने अपने को सचमु...वो खिड़की जो कभी बंद , कभी खुली रहती थी   पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा , किस तरह हम ३६ साल बाद अपने पुराने निवास पर पहुंचे । अब आगे --- बंद खिड़की को देखकर हम डूब गए ख्वाबों ख्यालों में । याद आया किस तरह हम खिड़की खोलकर बाहर का नज़ारा देखा करते थ...फ़ुरसत में … फ़ुरसत से मीठी यादें बांटते हुए!सलिल वर्मा* घर का बरामदा, बरामदे में लगी एक आराम कुर्सी, आरामकुर्सी के बगल में एक तिपाई, तिपाई पर चाय का प्याला, प्याले के पास प्लेट मे...

क्यों दूँ दोष विधाता को?आँख खुली हो, फिर भी पथ पर, समुचित चलना न आया, दीप, शिखा और तेलयुक्त हो, तब भी जलना न आया, मन भी रह रह अकुलाता हो बँधा व्यथा के छोरों में, आन्दोलित हो, अवसानों का कारण ढूढ़े औरों में, पर अनुभव के सोपानों मे...तुम्हारे आ जाने से...चैतन्यचैतन्य तुम्हारा आना जीवन में नई चेतना ले आया है उग आये हैं कुछ नए विचार मेरे ह्रदय के आँगन में और मैं गर्वित हूँ कि संवेदनशीलता से फूटती ये वैचारिक कोंपलें अपनी जड़ें जमा रही हैं ...बदलता मौसम....छंटते बादल.जया के कविता संग्रह को पुरस्कार मिलने पर पत्रकारों ने उसकी दर्द भरी कविताओं का राज़ पूछा . जया पुरानी यादों में खो गयी..उसका बच


वार्ता  को देते  हैं विराम, मिलते हैं शार्ट ब्रेक के बाद, हम जा रहे हैं साप्ताहिक टूर में……… वार्ता की जिम्मेदारी वार्ता धुरंधर मित्रों पर ……   तब तक के लिए राम राम

11 टिप्पणियाँ:

बहुत बढ़िया लिंक्स के साथ सार्थक ब्लॉग वार्ता प्रस्तुति के लिए आभार

रविवार का मानसिक आहार..

छुट्टी के दिन के लिए अच्छी खुराक ...

बहुत बढिया वार्ता ..

अच्‍छे लिंक्‍स उपलब्‍ध हुए !!

सब पढ़ लिये, धन्यवाद

बहुत बढिया वार्ता ... अच्‍छे लिंक्‍स...

मेरी पोस्ट को यहाँ शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ललित दादा !

सुंदर वार्ता.... सादर आभार।

बहुत बढिया वार्ता

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