बुधवार, 20 जून 2012

मनसर और अमरनाथ के हिम कपोत --- ब्लॉग4वार्ता …… ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, काव्य का कोई भरोसा नहीं कि कब उमड़ आए। कभी सोते-सोते तो कभी भागते-भागते। काव्य का उमड़ना ऐसी ही चीज है। वाल्मीकि से क्रौंच पक्षी का दर्द नहीं देखा गया और काव्य का सोता उमड़ पड़ा, रामायण लिखी गयी। कभी कभी विकट स्थिति में भी काव्य उमड़ पड़ता है। शरद कोकास - नीन्द न आने की स्थिति में लिखी कविता  का पांचवा भाग पोस्ट कर रहे हैं। वे कहते है - नीन्द के बारे में कहीं कोई लिखित नियम नहीं होता । कभी ऐसा भी होता है कि बेहद थके होने के बावज़ूद नीन्द नहीं आती और कभी ऐसा भी होता है कि दिनभर सोते रहने के बावज़ूद भी नीन्द आ जाती है । दर्शन कौर जी ने नैनीताल यात्रा को हनुमान की पूंछ  की तरह लम्बा खींच दिया। अब आई  है नैनीताल  पढिए जब नीलकंठ बोलें ,मुंडमाल हिले-डोलेगिरिबाला देख चौंक चौंक जाये, लगे एक-एक मुंड,किसी कथा का प्रसंग लिये भेद कुछ समाये है छिपाये . बार-बार कोई बात भूले सपन की सी याद मन- दुआरे की कुंडी बजाये , कभी लागे..

लक्ष्यशिक्षण एक कला है किंतु यह कला जन्म जात गुणो से युक्त गुरू सहज ढंग से कर लेता है दूसरी ओर अव्यस्थित चीजों, पाठय वस्तुओं, पाठयक्रमों को निर्धारित नियमानुसार विधि सम्मत समय पर पूर्ण कर पाना कहा सम्भव बन पड़त...योग भूल गए बाबा रामदेव ! पहले तो आज का सबसे बड़ा सवाल ये कि रामदेव हैं क्या ? सन्यासी हैं, योगगुरु हैं, आयुर्वेदाचार्य हैं, व्यापारी हैं, उद्यमी हैं आखिर क्या हैं रामदेव ?वैसे आमतौर पर लोग इस सवाल का एक ही जवाब देंगे कि वो योगगुर...ये बरसात की बीमारियाँपिछले वर्ष मैंने बरसात में कीड़ों के काट लेने से होने वाली परेशानियों और व्याधियों के उपचार के बारे में लिखा था .इस साल की बरसात में आप ये जानें कि तमाम बरसाती बीमारियों से अपने शरीर की रक्षा कैसे करनी ह..

‘क्रांति की मां’ तवक्कुल करमानयमन एक इस्लामिक देश है जहां पर्दा प्रथा का कड़ाई से पालन कराया जाता है। स्त्रियों को घर से बाहर निकलने की मनाही है। विवशता में ही वे घर से बाहर निकलें,** **यही उनसे अपेक्षा की जाती है।...मानसिक विकलांगता से कहीं बेहतर है,शारीरिक विकलांगतासत्यमेव जयते प्रोग्राम में जब differently able (जब अंग्रेजी में disable शब्द की जगह इस शब्द का प्रयोग होने लगा है तो हमें भी हिंदी में 'विकलांग' की जगह किसी दूसरे उपयुक्त शब्द की खोज और उसका प्रयोग शुरू क...मदद चाहिए हमको..अच्छा लगता है, देखना अपने नाम के आगे 'डॉ' लिखा, ज़रा वजनी हो जाता है नाम और सामने वाला चार बार सोचता है, आपसे बोलने से पहिले, लेकिन हमरी ऐसी तकदीर कहाँ, नहीं कर पाए न पी.एच.डी. फिर हमरे जैसे जाने कितने हैं, ...

मनसर की ओर यायावरअयोध्या का ददुवा राजा महल जीवन चलने का नाम, चलते रहो जब तक हो प्राण। चलना ही जीवित रहने का परिचायक है, ठहरना मुर्दा होने के समान। रमता जोगी और बहता दरया, दोनो ही उत्तम होते हैं। साधू रमता रहे तो दाग लगे न...बरखा कब आऊं? बरखा ने पूछा जब इच्छा हो मैंने कहा कितना भी भीगो सूखी ही रहोगी वह मुस्कुराकर बोली तु...दो पति- दो राष्ट्रपतिदेखिये साहब, ऐसे तो हमारा राष्ट्रपति पद से कुछ खास लेना नही है। देना नही भी चाहे, तो भी सरकार हियां उहां टैक्स लगा कर वसूल ही लेती है। लेकिन इन दिनो हम बड़े चिंतित है कि राष्ट्रपति कौन बनेगा। हम इसे बात ...मेरी संगिनी ......!मन का हठ दिल की है तड़प रूठी कलम . 2)कहाँ से लाऊं विचारो का प्रवाह शब्द है ग़ुम. 3)कैसे मनाऊं कागज कलम को हाथ से छुठे . 4)मेरी संगिनी कलम तलवार पक्की सहेली 5) प्यासा मन साहित्य की अगन ज्ञानपिपासा . 6...

वार्ता को देते  हैं विराम, बिजली रानी की आँख मिचौली के बीच वार्ता समय पर नहीं लग पाई। वर्तमान में तीन चीज महत्वपूर्ण हो गयी है मनुष्य की जीवन 1- गैस का सिलेंडर 2- बिजली रानी 3- राजा नल। इनके बिना सब सून। मिलते हैं एक ब्रेक के बाद, तब लीजिए लेट लतीफ़ वार्ता का आनंद

9 टिप्पणियाँ:

वर्तमान में तीन चीज महत्वपूर्ण हो गयी है मनुष्य की जीवन 1- गैस का सिलेंडर 2- बिजली रानी 3- राजा नल।
बदलते युग में स्‍वतंत्रता समाप्‍त और पराधीनता बढती जा रही है ..
मनुष्‍य को जल्‍द समझ आए तो बढिया है ..
अच्‍छी वार्ता के लिए आभार !!

इस बार गर्मी राजा नल ने बहुत सताया, बिजली रानी मेहरबान हैं, लेकिन आज 68 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोत्तरी का झटका दे गईं, गैस सिलेंडरजी के भाव तो पहले से काफी बढे हुए हैं, फिर भी उनकी आत्मा शांत नहीं होती...
वार्ता बढ़िया है, हमारी बरखा को स्थान देने के लिए आपका आभार...

आनन्द तो ले रहे है ..अभी तक नैनीताल का मोह ख़त्म नहीं हुआ है ....सच कहा जैसे हनीमून का मोह ख़तम नहीं होता वैसे ही मेरी पहाड़ो की प्यास ख़त्म नहीं होती ...क्यों मेरा मोह तोड़ रहे हो ? मेरे दिल के अरमान पूरे करने दो प्रभु .....:)

मेरे लेख -‘क्रांति की मां’ तवक्कुल करमान - को वार्ता में शामिल करने के लिए आभार....

शानदार वार्ता के लिए बधाई.

बढ़िया रही वार्ता.

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महोदय !

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----------रविकर ||

वार्ता बढ़िया लगी,,,,,

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