शनिवार, 9 जून 2012

तुम्हारी याद रात भर सोने नहीं देती ------ ब्लॉग4वार्ता -------- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, कहते हैं कि संगीत का जादू जब चढता है तो सिर चढ कर बोलता है। राज-पाट सब एक तरफ़ धरा रहता है और सब दांव पर लग जाता है। वाजिद अली शाह अवध के नवाब रहे ये तो आप सब जानते है लेकिन आप शायद यह नहीं जानते कि वाजिद अली शाह को 'ठुमरी' के संगीत विधा के जन्मदाता के रूप में भी जाना जाता है कहा जाता है कि जब अंग्रेजों ने अवध पर कब्जा कर लिया और नवाब वाजिद अली शाह को देश निकाला दे दिया, तब उन्होने 'बाबुल मोरा नैहर छूटो जाय्' यह प्रसिध्ह ठुमरी गाते हुए अपनी रयत से अलविदा कहा। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर…… मेरे साथ कीजिए कुछ उम्दा चिट्ठों की सैर……………

जादू की झप्पी आओ मुझसे मिलो बिना झिझके गले भी लगो मैने बना लिया है मौन का एक खाली घर जहाँ मैं हूँ और मेरे कंधे रो कर थके हुओं को सोने के लिए एक जादू की झप्पी के बाद रोने की नहीं होती कोई वजह और इसी...मृगतृष्णा .....शब्दों की चाक़ पर ढाले कुछ शब्दमृगतृष्णा* तपते मरुस्थल में रेत के फैले समंदर पर प्यासे पथिक को मृगतृष्णा भरमाती है शहरों में कोलतार सनी सड़कें भी भरी दुपहरी में भ्रम का संसार रचाती है ... प्रकृति का कोई खेल या भ्रम यूँ ही नहीं हो...दुआ का एक लफ्ज , और वर्षों की इबादतआध्यात्मिक बोध का अनुभव आत्मा की व्यापकता में है और यह व्यापकता तब बढती है जब मनुष्य खुद को अपने पहले दो रूपों से उपर उठा कर आत्मिक स्वरूप में स्थापित करता है . अब इस स्तर पर कोई भेद नहीं , कोई भ्रम नहीं...

कब्ज निवारक सरल उपचारअनुपयुक्त खान-पान के चलते कब्ज लोगों में एक सर्वाधिक प्रचलित रोग बन चुका है। यह पाचन-तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल विसर्जन की फ़्रिक्वेन्सी अलग-अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्ज...कोहरे के आगोश में... मैं उससे कहता कि यह सड़क मेरे घर जाती है- फिर सोचता कि भला सड़क भी कहीं जाती है. जाते तो हम आप हैं. एक जोरदार ठहाका लगाता और अपनी ही बेवकूफी को उस ठहाके की आवाज से बुनी चादर के नीचे छिपा देता. फिर तो हर ... हल्दीघाटी.......... वही मिला है जग मॆं सब कॊ, जिसनॆं जॊ कुछ बॊया, मिला ललाट कलंक किसी कॊ,कॊई सम्मान संजॊया, मात-पिता की सॆवा सॆ बढ़कर, और ना कॊई पूजा है, निज राष्ट्र-धर्म सॆ ऊँचा ...

सूरत तो देखिये..*जीवन ये आईना है , सूरत तो देखिये ,* *क्या अक्स ,दिख रहा है ,मंजर तो देखिये -* * * *जिस राह वो गए , वो राह रो पड़ी ,* *विरान गुलसितां की , हालत तो देखिये-* * * *हमकदम , हमरा..."ये छत बहुत हसीन है......"दालानों की धूप, छतों की शाम कहाँ घर के बाहर, घर जैसा आराम कहाँ...." कितने दिनों बाद घर की सुबह नसीब हुई, कल रात जब छत पर टहल रही थी यही तो सोच रही थी, मेरे लगाये दरख़्त अब बड़े हो चुके थे, गुलाब फूलने लगे...तुम्हारी याद रात भर सोने नहीं देती!!तुम्हारी याद रात भर सोने नहीं देती!! ज़माने की ताकीद हमे रोने नहीं देती!! तुम अमानत किसी और के हो क्या करें!! हालत दिल की बात हमें कहने नहीं देती!! वो मासूम बनने का करते हैं ज़ुर्म रोज़!! आदत अपनी कोई सज़ा...

लोग कहते हैं एक लाइन से जिन्‍दगी नहीं बदलतीमैं कभी नहीं भूल सकता उस शख्‍स को, नहीं नहीं यार मेरा उसकी ओर कोई उधार बाकी नहीं, बल्‍कि यह तो वो शख्‍स है, जिसने जिन्‍दगी के कुछ साल मांगे थे, और मैं मना करके भाग आया था। बस उसकी बातों को साथ लेकर और एक श...चाँद पर एक दादी रहा करती थी..चाँद पर एक दादी रहा करती थी... चरखा कातती... कपड़े बनाया करती... उजले कुर्ते, लाल कमीजें, काले स्वेटर... बादल जब भी चाँद से गुज़रते... दादी से ज़रूर मिलते थे... हर मौसमी त्योहार पर कपड़े जो मिलते थे... एक ब...भूली-बि‍सरी यादें.....अब तो खो गया सबपांच वर्ष की लड़की....पहली बार दि‍ल्‍ली से गर्मी की छुट़टि‍यां बि‍ताने गांव आती है अपनी मां और बड़े भाई के साथ। आते ही देखा उसने.....लकड़ी के चूल्‍हे में मां गरम-गरम धुसका चावल से बनने वाला छोटानागपुरी प...

पहाड़, गर्मी, मच्छर और सुबह के नौ बजे जमी हुई रेड वाइनइस साल पड़ी ऐतिहासिक गर्मी ने जब खाल में पर्याप्त भूसा भर दिया तब जाकर दिल्ली से मित्र आशुतोष बरनवाल ने रानीखेत जाकर दो-एक दिन ठण्ड में काटने का कार्यक्रम तय किया. एक और शानदार मित्र बंटी बख्शी ने रानीखेत से... गर्मी का देहाती दिन गर्मी का देहाती दिन कतरन वाला पंखा झलतेहुई बुआ की लाल हथेलीइधर उधर से हवा चुरा करअम्मा के आँचल ने ले लीउबासियों की परत जमातागर्मी का देहाती दिन छत की कड़ियों से चिपके हैंसहमे सहमे डरे कबूतरकोटर में से तके ...आलोचनाएं मजबूत बनाती हैं इन दिनों विधु विनोद चोपड़ा फुल टाइम प्रोड्यूसर के रोल में हैं। विधु को जो करीब से जानते हैं, वे ये भी जानते हैं कि एक पल हंसता खिलखिलाता चेहरा कैसे अगले ही पल एकदम से एक पत्रकार के लिए दुस्वप्न साबित हो ...

वार्ता को  देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम, तब तक यहाँ पढिए………

6 टिप्पणियाँ:

आज तो लिंक्स ही लिंक्स ...! मंगल ग्रह से की गयी वार्ता अच्छी लगी ...!

वाह... बेहतरीन लिंक्स का खजाना है आज की वार्ता... शुक्रिया ललित जी

बेहतरीन पठनीय सूत्र..

अच्छी वार्ता
बेहतर लिंक्स

बढ़िया लिंक्स हैं .

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