बुधवार, 15 अगस्त 2012

झूठे ख्‍वाव सी आजादी का वास्‍ता मत दे, ... ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

 नमस्‍कार ..आजादी का 65वां स्वतंत्रता दिवस आने पर हमारा मन गदगद हो उठा। पिछले साल हमने 65वां स्वतंत्रता  दिवस मनाया था और अब वह दिन दूर नहीं जब देश को आजाद हुए 100 वर्ष पूरे हो जायेंगे। अब आजाद हुए  हिन्दुस्तान को 100 वर्ष पूरे होने में मात्र 35 वर्ष ही शेष है। यह भी जल्द ही जा जायेंगे और फिर हम अपनी  आजादी का 100वां वर्ष बड़े ही धूमधाम के साथ मनायेंगे।

एक और स्वतंत्रता दिवस.....एक और मौका जब  हम "आई लव माई इंडिया" कहकर यह जता सके कि भाई हमें भी इंडिया की बड़ी चिंता हैं .....(सच मे हैं क्या??) हमें आज़ाद (?) हुए 65 वर्ष हो गए ,और इन 65 वर्षों में एक काम करने वाला व्यक्ति अपने जीवन का  दो तिहाई से अधिक हिस्सा समाप्त कर चूका होता है (अब तो 65-70 मे ही निकल लेते हैं)| आज़ादी के इन 65 ’’वर्षों में हमने क्या पाया और क्या खोया ??
दिल्ली ने !
अतीत के
अनगिनत उत्सव देखे हैं,
चक्रवर्ती सम्राटों के राजतिलक देखे हैं,
शत्रुओं की पराजय देखी,
विजय का विलास देखा,
अपूर्व उल्लास देखा,
परन्तु...
ऐसी एक घड़ी आई
जब...
सूर्योदय और सूर्यास्त का
अंतर मिटते देखा,


नमन है उन वीर जवानों को
जो देश की खातिर कुर्बान हुए
देश पर मर मिटनेवाले
वे वीर देश की शान हुए
पंद्रह अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है.
सपने सच होने बाकी हैं रावी की सपथ न पूरी है.
शहरों के फुटपाथों पर जो आंधी पानी सहते हैं.
उनसे पूछो वो आजादी के बारे में क्या कहते हैं

थाम तिरंगा हाथ में, आओ मिलकर जश्न मनाएं ।।

दे सलामी तिरंगे को, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत हम गाएं।

आओ मिलकर आज हम जगह -२ तिरंगा फहराएं ।।

याद करें उन अमर जवानों, शहीदों को आज हम,

जो इस भारत देश की खातिर मर मिट गए ।

पुलकित मेरा उद्-बोधन है, स्वतंत्रता-दिवस का क्षण है

गर्वानुभूति प्रकट करें हम, ह्रदय-हर्षित भीगा अंजन है

रोम-रोम दायित्व भरा जो, कल था वो आज भी है

हों चुनौतियां क्षितिज पे चाहें, पार करें परवाज़ भी है

वचनबद्ध कर लिए खड़े हम, अटल लक्ष्य का ये प्रण है

गर्वानुभूति प्रकट करें हम, ह्रदय-हर्षित भीगा अंजन है

भारत है वीरों की धरती, अगणित हुए नरेश।

मीरा, तुलसी, सूर, कबीरा, योगी और दरवेश।

एक हमारी राष्ट्र की भाषा, एक रहेगा देश।

कागा! ले जा यह संदेश, घर-घर दे जा यह संदेश।।
है कुदाल सी नीयत प्रायः, बदल रहा परिवेश।
कैसे बचेगा भारत देश?
बड़े हुए लिख, पढ़ते, सुनते, यह धरती है पावन।
जहां पे कचड़े चुन चुन करके, चलता लाखों जीवन।
दिल्ली में नित होली दिवाली, नहीं गाँव का क्लेश।
कैसे बचेगा भारत देश?
स्वतंत्रता दिवस की इस पूर्व सांझ पर
जब मैं चारों और नजरें घुमाता हूँ
नजर आता है एक धुंधलका
खोये हुए चेहरे
भटके हुए लोग
दम तोडती उम्मीदें
दफने हुए आदर्श !
एक शाम की बात
न मनोवैज्ञानिक , या अध्यापिका की नज़र से
वर्णन कर रही हूँ।
बस आम आदमी के कलम से
लिख रही हूँ।
क्या पाया , क्या खोया
हमने और देश ने स्वतन्त्र भारत के इस पर्व पे
सोच रही हूँ।
झूठे ख्‍वाव सी आजादी का वास्‍ता मत दे,
या खुदा मुझको ये सहारा मत दे,
टूट जाएंगी सब जंजीरें जुल्‍मों सितम की,
मुझको है तजुर्बा मुझे दगा मत दे।
अब भी भूखे हैं बच्‍चे उनके, जिनने पाला,

उनको उनके किए की सजा मत दे,

ना तन पे उजले कपड़े हैं
ना जीवन में सुखद क्षण
आज तरंगे के सम्मुख
कैसे जपे जन गण मन
भ्रष्टता की बढ़ी आबादी कैसी ये आजादी ,कैसी ये आजादी ?

‘क्या आज़ादी तीन थके हुए रंगों का नाम है,जिन्हें एक पहिया ढोता है,या इसका कोई ख़ास मतलब होता है’ धूमिल की ये पंक्तियाँ आज भी ज़हन में कई सवाल छोड़ जाती....आज़ादी...हम आज़ाद है, ये कहने पर एक बंधू बोल पड़े - क्यों मजाक करते हो भाई?कैसा चाहिए भारत...................? भारत विभिन्नताओं का देश है, ' अनेकता में एकता ' का नारा आज इसकी पहचान बन चुका है. दुनिया की तीसरी बड़ी उभरती हुई शक्ति के रूप में अपना एक मुकाम हासिल करता जा रहा है. ये तस्वीर का एक पहलू है पर दूसरा पहलू भी वाकई ऐसा ही है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि भारत में भूख, बीमारी और गरीबी के खिलाफ दूसरी आजादी की लड़ाई छेडऩे की जरूरत है, ताकि ये हमेशा के लिए समाप्त हो जाएं। राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने सम्बोधन में कहा, ‘‘हमें अब दूसरी आजादी की लड़ाई छेडऩे की जरूरत है, ताकि भारत भूख, बीमारी और गरीबी से हमेशा के लिए मुक्त हो जाए।

जैसा की हम सभी जानते है कि सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ का आरम्भ किया महर्षि दयानन्द सरस्वती ने और इस यज्ञ को पहली आहुति दी मंगल पांडे ने। देखते ही देखते यह यज्ञ चारों ओर फैल गया। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्यां टोपे और नाना राव जैसे योद्धाओं ने इस स्वतंत्रता के यज्ञ में अपने रक्त की आहुति दी। दूसरे चरण में 'सरफरोशी की तमन्ना' लिए रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव आदि देश के लिए शहीद हो गए। आपने अक्सर लोगों को नारी स्वतंत्रता के विषय में बात करते सुना होगा और शायद लोगों की नज़र में काफी हद तक नारी स्वतन्त्र हो भी चुकी है, पर क्या ये स्वतंत्रता सही मायने में नारी-स्वातंत्र्य है... क्या वेशभूषा, भाषा में क्रांतिकारी बदलाव, घूमना-फिरना, मनमानी आज़ादी यही नारी स्वतंत्रता है? क्या हासिल हुआ इस स्वतंत्रता से समाज को और नारी को भी.....??

"सभी राष्‍ट्रों के लिए एक ध्‍वज होना अनिवार्य है। लाखों लोगों ने इस पर अपनी जान न्‍यौछावर की है। यह एक प्रकार की पूजा है, जिसे नष्‍ट करना पाप होगा। ध्‍वज एक आदर्श का प्रतिनिधित्‍व करता है। यूनियन जैक अंग्रेजों के मन में भावनाएं जगाता है जिसकी शक्ति को मापना कठिन है। अमेरिकी नागरिकों के लिए ध्‍वज पर बने सितारे और पट्टियों का अर्थ उनकी दुनिया है। इस्‍लाम धर्म में सितारे और अर्ध चन्‍द्र का होना सर्वोत्तम वीरता का आहवान करता है।" मैं आपका अपना ‘राष्ट्रीयध्वज’ बोल रहा हूं। मेरे बारे में आपको संपूर्ण जानकारी नहीं दी गई। क्यों नहीं दी गई? कौन जिम्मेदार है? यह प्रश्न यहां आचित्यहीन है। अत: मैं स्वयं आपके सामने आया हूं। अपने बारे में आप सभी को बताने के लिए गुलामी की काली स्याह रात अंतिम प्रहर जब स्वतंत्रता के सूर्य के निकलने कासंकेत प्रभातबेला ने दिया, उस दिन 22 जुलाई 1947 को भारत की संविधान के सभा कक्ष में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मुझे विश्व एवं भारत के नागरिकों के सामने प्रस्तुत किया। यह मेरा जन्म पल था।

ये तिरंगा नहीं हमारी जान है ;
फलक पर फहरता तिरंगा भारत का सम्मान है .
ते तिरंगा नहीं ................
लाखो देशभक्तों ने प्राण न्यौछावर किये ;
१५ अगस्त ४७ को तब आजाद हुए ,
याद दिलाता तिरंगा शहीदों की पहचान है .
ये तिरंगा नहीं .......
प्रथम स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दृढ़ प्रतिज्ञा लेते हुए यह घोषणा की थी कि हम निश्चय ही एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करेंगे। यह भारत न केवल विचारों में, कार्यो में और संस्कृति में शक्तिशाली होगा, बल्कि मानवता की सेवा के मामले में भी आगे होगा। लेकिन क्या हम ऐसा सचमुच कर पाए? व्यंग/आजादी जिंदाबाद ! हैपी इंडीपैंडेस डे ! इंडीपैंडेस का मतलब होता है आजादी ! आजादी मतलब कुछ भी करने की आजादी ! दंगा - फसाद करने की आजादी , घोटाले करने की आजादी , रिश्वत लेने और देने की आजादी , अफवाहें फैलाने की आजादी , धर्म - जात और बिरादरी के नाम पर दुकानदारी चलाने की आजादी , अपना ईमान - धर्म बेचने की आजादी ..... वगैरह - वगैरह।हम आजाद हैं, हम आजाद थे और आजाद रहेंगे। 18 साल के बाद वोट करने का अधिकार आपके हाथ में है, जिससे आप सत्ता पलटने ताकत रखते हैं। भगवान आपकी तरफ तलवार फेंकता है, यह निर्भर आप पर करता है कि आप उसको धार से पकड़ना चाहेंगे या हत्‍थे से। वोट का अधिकार सरकार द्वारा फेंकी तलवार है, अब निर्भर आप पर करता है कि आप लहू लहान होते हैं या फिर उसका औजार की तरह इस्‍तेमाल करते हैं।
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !




7 टिप्पणियाँ:

स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभ कामनाएं |बहुरंगी लिंक्स |
आशा

वे क़त्ल होकर कर गये देश को आजाद,
अब कर्म आपका अपने देश को बचाइए!

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,,

बढिया वार्ता
आजादी की वर्षगांठ पर ढेर सारी शुभकामनाएं

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !रोचक वार्ता

बहुत सुन्दर वार्ता, बढ़िया लिंक्स... स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ...

बहुत सुन्दर वार्ता स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ...

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