शनिवार, 25 अगस्त 2012

पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल ओए --------- ब्लॉग4वार्ता ----- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  केन्द्र सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय ने घृणा फ़ैलाने वाले ब्लॉग, वेबसाईट, फ़ेसबुक, ट्वीटर, यू ट्यूब एवं अन्य सोशियल वेबसाइट को बंद करने के लिए संबंधित सेवा प्रदाताओं को नोटिस जारी कर दिया है। भारतीय संविधान ने हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है। इसक अर्थ नहीं है कि गाली-गलौज करने या किसी के धर्म एवं सम्प्रदाय की खिल्ली उड़ाने की आजादी मिल गयी है। अरे! शासन के भ्रष्टाचार को उजागर करो। समाज में विसंगतियाँ दिखाई दें, उन पर लिखो, कहीं किसी पर अकारण अत्याचार हो रहा है इस पर लिखो, सामाजिक सरोकार पर लिखो, लेकिन संयत एवं संसदीय भाषा में, इसकी आजादी है। वैमनस्य फ़ैलाने वाले लोग ग्रुप बनाकर समाज की एकता एवं शांति भंग करने का एक सूत्रिय कार्यक्रम बना लिए हैं । इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। यदि संयत एवं संसदीय भाषा में लिखने पर भी अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटा जा रहा है तो इसका सरासर विरोध करना चाहिए। फ़िर कफ़न बांध कर वही आजादी का तराना याद गाना चाहिए ……… पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल ओए …………अब चलते हैं आज की वार्ता पर……… प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा लिंक्स। 

एक रूमानी गाँव की कथावैसे तो वो एक गाँव है एक आम पहाड़ी गाँव वैसे ही एक के ऊपर एक बने घर वैसे ही घुमावदार मगर साफ सुथरे रास्ते, उतनी ही साफ़ सुथरी हवा और सामने हजरों फुट गहरी खायी के पार हिमालय की लुकाछिप...बख्शीश का भूखा न हो जो, कोई ऐसा दरबान देना दस्तूर ही कुछ ऐसा है कि हर महिला की ये दिली ख्वाईश होती है कि उसकी लडकी को उससे भी बढ़कर अच्छा पति मिले ! और साथ ही उसे यह भी पक्का भरोसा होता है कि उसके लड़के को उतनी अच्छी बीबी नहीं मिलेगी, जितनी कि उस...गाफ़िल प्यार पे उज़्र तो रहता है यूँ जमाने को ये अलग बात है ये आज हुआ है तुमको ! साथ चलत...

रतनपुर का गोपल्ला बिंझवार रतनपुर किले का द्वारदोपहर के 12 बज रहे थे हम बस स्टैंड के पास स्थित हाथी किला की ओर चल पड़े। यह किला केन्द्रीय पुरातत्व के संरक्षण में है। यहाँ केन्द्रीय पुरातत्व के 3 कर्मचारी हैं, पर मुझे एक भी नहीं मिला।...हिन्‍दी व्‍यंग्‍य लेखनआयोजन यह दिल्‍ली में है इसमें आएंगे जो जन मन उनके महक जाएंगे व्‍यंग्‍य के तीखे फूल वहां पर खिलाए जाएंगे आप खाने मत लग जाना फूलों को मानवता के कवितायेँ आजकल " वाद" की ड्योढ़ी पर ठिठकी हैं ह्रदय - अम्बुधि अंतराग्नि से पयोधिक -सी छटपटाती *उछ्रंखल * प्रेममय रंगहीन पारदर्शी कवितायेँ जिन्हें लुभाता है सिर्फ एक रंग कृष्ण की बांसुरी का लहरों के मस्तक पर धर पग लुक छिप खेलती प्रबल वेग के...

भय बिन होय न प्रीति कुमाऊनी और गढ़वाली समाज की बहुत सी बातें अनोखी रही हैं, अभी कुछ वर्ष पहले तक वर्ण-व्यवस्था, कर्म-काण्ड, जात-पात, छुआछूत, भूतप्रेत व अन्ध विश्वासों का ऐसा जोर था कि बाहर वाले लोग एकाएक विश्वास नहीं कर पाये...बूंदों का रंग बुरा मत बोलो ,बुरा मत देखो,बुरा मत सुनो ... नकारत्मक को नकार कर सकारत्मक को साकार कर पाना मुश्किल तो है ...किंतु ज्ञान ही हमारे मन को समृद्धी देता है ...!!हम कहीं भी जायें हमरा मन हमसे आगे आगे ही चलता ...आज hindi2tech के 3 वर्ष पूरे सन 2009 में आज ही के दिन यानि 24 अगस्त को इस ब्लॉग का पहला लेख प्रकाशित हुआ था । इस लिहाज से आपका यह ब्लॉग आज तीन साल का हो गया है । तो अब ये मौका है आप सभी को बढ़िया और धन्यवाद् का क्यूंकि आपके ही परोक्ष...

हम दोनों चले जायेंगे उत्तरी ध्रुव किसी प्रेतात्मा को छूकर आई ख़राब हवा थी। किसी आकाशीय जादुई जीव की परछाई पड़ गयी थी, शराब पर। किसी मेहराब पर उलटे लटके हुए रक्तपिपासु की पुकार में बसी थी अपने महबूब की याद। दुनिया का एक कोना था और बहुत...घर गुलज़ार .... बिटिया से ( हाइकु नन्ही बिटिया महकता आँगन खुशी के पल । पलाश खिले घर गुलज़ार है बेटी जो आई । प्यारी सी धुन बिटिया की मुस्कान गूँजे संगीत . बेटी का आना सावन की फुहार ज़िंदगी मिली . ...पालक हित में काम करें स्कूलों की गलाकाट प्रतिस्पर्धा और बेतहाशा स्कूल फीस वृद्धि से उकताए शिक्षानगरी भिलाई के पालकों को उस वक्त बड़ी उम्मीद बंधी थी कि कम से कम उनकी पीड़ा को सुनने वाला कोई संगठन तो तैयार हुआ। उनको ...

अमर शहीद राजगुरु जी १०४ वी जयंती शिवराम हरि राजगुरु (मराठी: शिवराम हरी राजगुरू, जन्म:२४ अगस्त १९०८ - मृत्यु: २३ मार्च १९३१) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे । इन्हें भगत सिंह और सुखदेव के साथ २३ मार्च १९३१ को फाँसी ...थोड़ा वाद करें, विवाद करें आओ सम्वाद करें चमन में मुरझाते हुए फूलों पर जंगल में ख़त्म होते बबूलों पर माली से हुई अक्षम्य भूलों पर सावन में सूने दिखते झूलों पर कि कैसे इन्हें आबाद करें........आओ सम्वाद करें गरीबी व भूख ...गोली कुछ दिन पहले एक पुस्तक पढ़ी..“गोली”...आचार्य चतुरसेन द्वारा लिखी इस पुस्तक मे राजस्थान की एक पुरानी परंपरा को दर्शाया गया है...प्राचीन समय मे ऐसा रिवाज था कि छोटी जाति की लड़कियों को राजा अपनी दासी बनाकर ...

दुनिया की अद्भुत रेल यात्रायें पहाड़ी नदी के समानांतर चलती सड़क और रेल, मानो आपस में होड़ लगा रही हों . इस जगह तो सड़क भी खतरनाक दिखती है . फिर रेल तो कमाल दिखा रही है . बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच बर्फीली घाटी से गुजरती रेल ....ये हमारा लीवर और भूमि आमलाआजकल देश में लीवर बढ़ने की समस्या बड़ी तेजी से फैलती जा रही है . ये रोग लीवर सोरायसिस ,लीवर फेल्ड ,लीवर पेशेंट, आदि कई रूपों में दिखाई दे रहा है। एसिडिटी, हाजमा खराब होना इसके प्राथमिक लक्षण हैं . उलटी दस...Bolte VIchar 64 नि‍र्णय के पूर्व बोलते विचार 64 नि‍र्णय के पूर्व आलेख व स्‍वर डॉ.रमेश चंद्र महरोत्रा महेश अपने भाई और पिता से जमीन-जायदाद संबंधी मुकदमा लड़ रहे थे, जिस सिलसिले में उन्हें अपने गाँव से अपनी बड़ी बहन के नगर कई बार जाना...


कार्टून ...



वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम

7 टिप्पणियाँ:

आभार ललित जी उम्दा वार्ता में मेरी रचना को स्थान दिया ...!!

बधाई , बढ़िया रचनाओं से भरे लेख के लिए !

आज की वार्ता का लूक बहुत प्यारा है ... इतने उम्दा लिंक्स के बीच मेरी पोस्ट को भी मान देने के लिए आपका आभार ... ललित दादा !

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